सोमवार, 6 जून 2011

छाई घटा घनघोर








बादल रे, उमड़-घुमड़ बरसन लागे
बिजुरी चमक जिया डराये ,बादल रे

2 टिप्‍पणियां:

  1. तसव्वुर
    अक्स
    अलफ़ाज़
    और इज़हार ....
    सब
    काबिल-ए-ज़िक्र !!

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  2. आपके यहाँ अभी घटा सफ़ेद है खोपोली में काली हो गयी है...काली घटा छाये...

    नीरज

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