रविवार, 5 जून 2011

दिया सा रात भर जलता रहा है।




तेरे आने का धोखा-सा रहा है।
दिया सा रात भर जलता रहा है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बक़ोल मीना कुमारी जी
    चाँद तनहा है , आसमाँ तनहा ...

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  2. मुझे शेर याद नहीं आ रहा जिसमें शायर दूज के चाँद को अपनी माशूका के पाँव का नाखून बताता है...उसी शायर की याद आ गयी इस चित्र को देख कर.

    नीरज

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