गुरुवार, 25 अगस्त 2011

Twilight





दरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में
पहाड़ी जंगलों के बाहर फेंक आते हैं !
मगर वो शाम...
फिर से लौट आती है, रात के अन्धेरे में
वो दिन उठा के पीठ पर
जिसे मैं जंगलों में आरियों से
शाख काट के गिरा के आया था !!

गुलज़ार


Posted For SkyWatch Friday

14 टिप्‍पणियां:

  1. झुरमुट में दुपहरिया कुम्हलाई
    खोतों पर अँधियारी छाई
    पश्चिम की सुनहरी धुंधराई
    टीलों पर, तालों पर
    इक्के दुक्के अपने घर जाने वालों पर
    धीरे-धीरे उतरी शाम !

    -- धर्मवीर भारती

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  2. आप के पेड़ों से चिड़ियों की चहचहाहट सुनायी दी :)

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